| Friday, 21 June 2013 13:56 |
अब नतीजे तो भुगतने ही होंगे । ऐसी प्राकृतिक आपदा तो मैने कभी नहीं देखी । अभी भी नहीं संभले तो सब खत्म हो जायेगा ।''उत्तराखंड में आई भीषण बाढ को पहाड़ों के साथ छेड़खानी का नतीजा बताते हुए मशहूर पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा ने कहा है कि इस त्रासदी के बाद भी नहीं संभले तो सब खत्म हो जायेगा जबकि एक और पर्यावरण विशेषज्ञ डाक्टर अनिल जोशी ने आपदा प्रबंधन में स्थानीय लोगों को शामिल करने का सुझाव दिया है । उन्होंने कहा ,'' पिछले एक दशक में लगातार उत्तराखंड में बादलों का फटना और भूस्खलन जैसी घटनायें हो रही है लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार ने एहतियातन कोई कदम नहीं उठाये । जब क्षमता से अधिक तादाद में तीर्थयात्री केदारनाथ जा रहे थे तो मौसम विभाग ने अलर्ट क्यो नहीं किया ।'' उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना होगा कि विकास का कौन सा माडल अपनाया जाये जिससे इस तरह की आपदाओं को नियंत्रित किया जा सके । उन्होंने कहा ,'' विकास के आर्थिक माडल को अपनाते समय पारिस्थितिक संतुलन को भी ध्यान में रखना होगा ।'' जोशी ने कहा कि हिमालय क्षेत्र के व्यवसायीकरण पर रोक लगाना जरूरी है क्योंकि यह काफी भुरभुरा क्षेत्र है । उन्होंने कहा ,'' संतों ने चारधाम शांति और सुकून के साथ ईश्वर की शरण में जाने के लिये बनाये थे लेकिन इंसान ने इनके आसपास इतना व्यवसायीकरण कर दिया है कि ये भुरभरे पहाड़ हो गए हैं जो अब आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं ।'' |
Friday, June 21, 2013
'बंद करें पहाड़ों के साथ छेड़छाड़ वरना कुछ नहीं बचेगा'
'बंद करें पहाड़ों के साथ छेड़छाड़ वरना कुछ नहीं बचेगा'
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