| uesday, 13 March 2012 15:30 |
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे ज्यादा समस्या सब्सिडी के मार्चे पर खड़ी हुई है। डालर के मुकाबले रुपये की दर में भारी गिरावट से आयात महंगा हो गया। इससे उर्वरक और पेट्रोलियम पदार्थों का आयात खर्च बढ़ गया। उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी में बजट अनुमान से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक वृद्धि हो गई। इससे राजकोषीय घाटे पर भारी दबाव बढ़ गया। इससे राजकोषीय मजबूती का सरकार का प्रयास धरा का धरा रह गया। वित्त मंत्री ने पिछले बजट में उर्वरक, केरोसीन के लिये नकद सब्सिडी सीधे लाभार्थी के हाथों में देने की दिशा में आगे बढ़ने की घोषणा की थी। इसके लिये नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक समिति को काम सौंपा गया था और कहा गया था कि मार्च 2012 तक इस तरह की प्रणाली काम करने लगेगी। बहरहाल, इस दिशा में बात आगे नहीं बढ़ पाई है। |
Tuesday, March 13, 2012
राजनीतिक, आर्थिक चुनौतियों के बीच बजट में प्रणव की अग्निपरीक्षा
राजनीतिक, आर्थिक चुनौतियों के बीच बजट में प्रणव की अग्निपरीक्षा
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