| Wednesday, 25 January 2012 09:42 |
नई दिल्ली, 25 जनवरी। कांग्रेस से गठबंधन की वजह से बसपा को कोस रहे हों पर टिकट बांटने में अजित सिंह को मायावती का फार्मूला ही रास आया है। उत्तर प्रदेश में अपने हिस्से की 46 विधानसभा सीटों पर अजित ने नौ मुसलमान और आठ गैरजाट पिछड़ों को उम्मीदवार बनाया है। 11 जाट उम्मीदवार भी उत्तर प्रदेश के लिहाज से तो पिछड़ों की सूची में ही हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने यूपी के जाटों को अभी पिछड़ा नहीं माना है। उत्तर प्रदेश में उन्हें पिछड़े तबके में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त ने शामिल किया था। पर उलटबांसी देखिए कि जाटों के सूबे में सबसे बड़े नेता माने जानेवाले अजित सिंह ने 46 में से एक भी टिकट रामप्रकाश गुप्त की बनिया बिरादरी को नहीं दिया है। अगड़ों में अजित सिंह ने राजपूतों को तरजीह दी है। सात राजपूत उम्मीदवारों में चर्चित रिटायर पीसीएस अफसर बाबा हरदेव सिंह एत्मादपुर और बिलारी के राजपरिवार के नाती युवराज दिग्विजय सिंह को बिलारी से ही उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के एमएलसी रह चुके मुन्ना सिंह चौहान को फैजाबाद की बीकापुर सीट से टिकट दिया गया है। मथुरा के जाट विधायक अनिल चौधरी को इस बार टिकट नहीं दिया गया है। इसी तरह इगलास और खैर से पिछली बार जीते अपने विधायकों को भी निराश किया है। बेशक इगलास और खैर सीटें परिसीमन की वजह से अस्तित्व में नहीं बचीं पर उनकी जगह नई बनी सीटों पर भी राजपाल वालियान जैसी कृपा अजित ने इन दोनों पर करना जरूरी नहीं समझा। उम्मीदवारों के चयन में अजित हर सीट पर जातीय जोड़तोड़ बिठाने की कोशिश में नजर आते हैं। मसलन, कहीं उन्हें जाट और मुसलमान गठजोड़ की उम्मीद है तो कहीं जाट और गूजर की। अपनी छह सुरक्षित सीटों पर उन्होंने केवल बलदेव में ही मायावती की जाटव जाति के मौजूदा विधायक पूरन प्रकाश को मौका दिया है। बाकी चारों सुरक्षित सीटों पर गैर जाटव दलित यानी धोबी और खटीक उम्मीदवार उतारे हैं। जिन तीन ब्राह्मणों को उम्मीदवार बनाया है उनमें मोदी नगर के सुदेश शर्मा अभी नगरपालिका के चेयरमैन हैं। जाट उम्मीदवारों में राजपाल बालियान (बुढ़ाना), स्वामी ओमवेश (चांदपुर), अनिल कुमार (कांठ), यशवीर सिंह (सिवाल खास), वीरपाल राठी (छपरौली), अश्विनी तोमर (बड़ौत), राजीव चौधरी (अनूप शहर), किरनपाल सिंह (शिकारपुर), प्रताप चौधरी (सादाबाद), जयंत चौधरी (मांठ) और बाबूलाल (फतेहपुर सीकरी) हैं। इनमें ओमवेश, किरनपाल और बाबूलाल मंत्री रह चुके हैं। किरनपाल सपा छोड़ कर रालोद में आए हैं। छाता से उम्मीदवार बनाए गए तेजपाल सिंह ठाकुर भी पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। अजित की सबसे ज्यादा आलोचना सरधना से हाजी याकूब कुरेशी को उम्मीदवार बनाने के लिए हो रही है। याकूब पिछला चुनाव यूडीएफ उम्मीदवार की हैसियत से मेरठ शहर से जीते थे। फिर बसपा में शामिल हो गए थे। पर उनकी विवादास्पद छवि और भड़काऊ गतिविधियों की वजह से मायावती ने उन्हें पिछले दिनों पार्टी से निकाल दिया था। |
Wednesday, January 25, 2012
अजित सिंह को भी भाया मायावती का फार्मूला
अजित सिंह को भी भाया मायावती का फार्मूला
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